Sunday, September 26, 2010

अब और नहीं...

आजतक जो हुआ
उसे भूल जाना
एक डरावना
अतीत समझकर।

बनना ही होगा
तो बनना रांझे की हीर,
बनकर शीरी
खोज लेना अपना फरहाद
जो रहेगा सदा तेरे साथ
तेरा हमदम,
हम-कदम बनकर।

चाहकर भी
नहीं करना स्वीकार
दोहरा वनवास,
अपहरण का दंश,
अंत में धरती की गोद।
नहीं करना स्वीकार
उर्मिला की तरह
थोपा गया एकाकीपन
चाहे कारण क्यों न हों
कितने भी उद्दात,
नहीं बनना कान्हे की राधा
जो विरह का योग बने,
बस तस्वीरों में रह जाये साथ,
अब नहीं चढ़ना
चौपड़ के दाव पर,
नहीं करना स्वीकार
औरों के कारण
अज्ञातवास ,

चौखट के पीछे
मत काट लेना
अपना सारा जीवन,
मत करना
सिर झुकाकर स्वीकार
दूसरा वनवास
ये सोचकर की तू नारी है,
सोच में बदलाव
तेरी जिम्मेवारी है.
आज भी अगर
ऐसा नहीं हुआ तो
नहीं लिख पाओगी
जीवन की नई कहानी,
नहीं सूखेगा कभी
तेरे आँखों का पानी.

आगे बढ़ो और गढ़ लो
एक नई परिभाषा
प्यार की, रिश्तों की.
अर्पित करो स्वयं को
संबंधों पर
ताकि "समर्पण" का अर्थ
बदल जाये,
विस्तृत हो जाये
संबंधों का आयाम.
मत करो उत्सर्ग
बे सिर-पैर की परम्पराओं में बंधकर.
तुम्हारे मान में ही है
सबका मान,
तुम्हारे सम्मान पर ही टिका है
औरों का सम्मान.

13 comments:

  1. बहुत सशक्त रचना ...प्रेरणादायक ..

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  2. Beautiful as always.
    It is pleasure reading your poems.

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  3. आपकी पिछली रचनाओं की तरह ही सशक्त अभिव्यक्ति.. सुंदर कविता और कविता के विचार.. बधाई !

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  4. बहुत बहुत अच्छी कविता...आज की शायद सबसे अच्छी.

    शुक्रिया इसे पढाने के लिए.

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  5. utsarg wahan jo kare hud ko utsarg
    ....
    maine yahi koshish ki hai, khona yun bhi hai , waise bhi hai... to aansuon ke madhya ek sachchi muskaan talashti hun...."
    bahut hi achhi rachna

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  6. tumhare samman par hi tika hai
    auro ka samman..........

    bahut sach kaha aapne!!

    shandar.....ati sundar!!

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  7. बहुत ही खुबसूरत रचना!

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  8. Tilak Raj Kapoor to me
    कविता सार्थक संप्रेषण में समर्थ है, विषयवस्‍तु सामयिक सकारात्‍मक दृष्टिकोण प्रस्‍तुत करती है।
    बधाई
    सादर
    तिलक

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  9. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 28 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  10. bahut samyik aur shashkt rachna.charcha manch me shamil hone par badhai....

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  11. तुम्हारे सम्मान पर ही टिका है औरों का सम्मान...अच्छा संदेश... सुंदर ओर प्रेरणादायी रचना।

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  12. kya baat hai rajiv sir, apne bada hee utam likha hai specially comparision

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  13. Punarvyaakhya aur punaravlokan, review tarkik vidhi se anivar batlat ek aisi post jo samaj ko nai disha dene ka saamarthy rakhti hai. Thanks too much thanks again.

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