Tuesday, June 21, 2011

तुम तक जाना है मुझे

तुम तक जाना है मुझे
समय कटता नहीं,
विरह में जलता हूँ,
हसरत-भरी निगाहों से
देखता हूँ
सामने
सड़क के पार
जहाँ है तुम्हारा घर
हरियाली के बीच.

हमदोनों के घरों के बीच
है चिलचिलाती धूप
जेठ की दोपहरी की
हैं दरारों भरे सूखे खेत,
जहाँ चलते हैं
लू के बेरहम थपेड़े
गर्म हवाओं में बहता है
पानी का भरम.
दिखता है चारो ओर
पानी ही पानी ,
प्यास ही प्यास.
रास्ते लगते हैं
ठिठककर ठहरे हुए.

चाहत और दूरियां
चलती हैं साथ-साथ
एक-दूसरे के समानान्तर.
न दूरियां ख़त्म होती है
न ही मिलन की आस .

ख़ुशी बस इतनी सी है
तुम बस जाओगी
मेरी यादों में
एक तड़प बनकर.

तड़प
जो इंतजार करना सिखाता है,
औरों के लिए
जीना-मरना सिखाता है.

(अतीत से वर्तमान तक से पोस्ट किया गया पुराना पोस्ट है)

16 comments:

  1. सचमुच कहीं तक की यात्रा करा गई यह कविता... बहुत बढ़िया

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  2. चाहत और दूरियां
    चलती हैं साथ-साथ
    एक-दूसरे के समानान्तर.
    न दूरियां ख़त्म होती है
    न ही मिलन की आस .

    सच में कुछ सम्बन्ध समानान्तर रेखा बन कर रह जाते हैं...बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना..

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  3. चाहत और दूरियां
    चलती हैं साथ-साथ
    एक-दूसरे के समानान्तर.
    न दूरियां ख़त्म होती है
    न ही मिलन की आस .
    ...truth.

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  4. वाह .. बहुत खूब कहा है ...।

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  5. तड़प
    जो इंतजार करना सिखाता है,
    औरों के लिए
    जीना-मरना सिखाता है.

    इंतज़ार का भी एक मज़ा है.

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  6. सुन्दर है ये इंतज़ार भी

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  7. tadap jaanleva bhi hai aur zindgi ka sabab bhi.

    sunder abhivyakti.

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  8. चाहत और दूरियां
    चलती हैं साथ-साथ
    एक-दूसरे के समानान्तर.
    न दूरियां ख़त्म होती है
    न ही मिलन की आस .

    बहुत अच्छी लगीं पंक्तियां....

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  9. यही तड़प है जो शान्ति से बैठने भी नहीं देती है।

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  10. ये तड़प और ये सोच ...हर छोटी बड़ी बात की ...जीने भी नहीं देती

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  11. चाहत और दूरियां
    चलती हैं साथ-साथ
    एक-दूसरे के समानान्तर.
    न दूरियां ख़त्म होती है
    न ही मिलन की आस .


    आन्तरिक भावों के सहज प्रवाहमय सुन्दर रचना....

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  12. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  13. एक-दूसरे के समानान्तर.
    न दूरियां ख़त्म होती है
    न ही मिलन की आस .

    ...बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना..

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  14. हर शब्‍द बहुत कुछ कहता हुआ, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये बधाई के साथ शुभकामनायें ।

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  15. कुछ व्यक्तिगत कारणों से पिछले 20 दिनों से ब्लॉग से दूर था
    इसी कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका !

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