Wednesday, March 23, 2011

दुपट्टे की लाली

तुम्हारे दुपट्टे की लाली मे
सुबह का सूर्य बिम्बित है
उजाले का प्रथम सन्देश लेकर .

तुम्हारे रक्तिम ओठों का
मूक आमंत्रण
मेरे जीवन का सार ,
प्रगति का आधार है.

सूरज सा लगता है
तुम्हारा साथ,
निराशा में भी करती है
आशा का संचार.

तुम्हारे होने मात्र से ही
रौशन है
हमारा दिन,
हमारी रात,
तुममें ही समाया है
हमारा पूरा संसार.

तुम हो
तो दिन हमारा है,
रात हमारी है,
आसमान में टंगा सूरज,
चाँद हमारा है,
सारी दिशाएं,
हमारी है .

जरूरत है तो बस
उन्हें उगते-डूबते,
डूबते-उगते
देखते रहने की,
समझते रहने का
उनसे आता पैगाम
तुम्हारे सहारे .

27 comments:

  1. आदरणीय राजीव जी..
    नमस्कार
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ ही एक सशक्त सन्देश भी है इस रचना में।

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  2. रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को|
    कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका

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  3. तुम हो
    तो दिन हमारा है,
    रात हमारी है,
    आसमान में टंगा सूरज,
    चाँद हमारा है,
    सारी दिशाएं,
    हमारी है
    ........सार्थक और भावप्रवण रचना।

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  4. Rajiv sir aap bhi hamari tarah let-lateef ho gaye hain, bahut dino par aapki rachnayen mil rahi hai...!
    ye alag hai der se hi sahi...aisee rachna aayee jo kahin dil me lagi...kuchh satranga sa chamka...:)
    kuchh purani yaad aayee...
    par jo bhi hua...ekdum se achchha laga..!
    badhai!

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  5. तुम हो
    तो दिन हमारा है,
    रात हमारी है,
    आसमान में टंगा सूरज,
    चाँद हमारा है,
    सारी दिशाएं,
    हमारी है .
    bahut kuch simat aaya hai is tum me

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  6. अच्छी रचना ...मन के भावो का सुन्दर चित्रण
    मंजुला

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  7. बहुत सुन्दर रचना ! मनोभावों की सशक्त प्रस्तुति ! बधाई स्वीकार करें !

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  8. दुपट्टे में लहराते मन के भाव।

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  9. राजीव जी काफी दिनों बाद आपकी कोई कविता पढने को मिली और मन आह्लादित हो गया .. बहुत सुन्दर रचना.. दुप्पटे में लहराते मन के भाव की अभिव्यक्ति बड़े रोमांटिक अंदाज़ में हुई है.. बहुत बढ़िया..

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  10. भावपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति इस रचना के माध्यम से मुखरित हुई है.

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  11. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (24-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  12. जरूरत है तो बस
    उन्हें उगते-डूबते,
    डूबते-उगते
    देखते रहने की,
    समझते रहने का
    उनसे आता पैगाम
    तुम्हारे सहारे .

    बहुत सार्थक भावमयी प्रस्तुति..बहुत सुन्दर

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  13. डाकिया डाक लाया...

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  14. बहुत सुंदर रचना।

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  15. तुम हो
    तो दिन हमारा है,
    रात हमारी है,
    आसमान में टंगा सूरज,
    चाँद हमारा है,
    सारी दिशाएं,
    हमारी है .

    भाव पूर्ण रचना के लिए बधाई.

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  16. mini seth to me

    BAHUT KHOOB.....BAHUT BAHUT ACCHA LIKHTE HO AAP

    PADH KAR MAAN KHUSH HO JATA HAI

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  17. komal bhawon ki bahut hi sundar kavita.

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  18. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने! बधाई!

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  19. बहुत सुन्दर रचना.

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  20. आदरणीय राजीव सर
    नमस्कार . बहुत दिनों बाद आज मेल पर आया हूँ.. और आते ही आपकी एक खूबसूरत कविता पढने को मिली... आपकी कविता में साधारण होते हुए भी कुछ नई बात कह जाती है नए विम्ब के साथ...सर बड़ी बात यह नहीं कि बड़े और लोफ्टी एवं हाई सौन्डिंग शब्दों में बात कही जाए... बड़ी बात यह है कि साधारण और सहजता से सहज बातें कही जाएँ... प्रेम, एक दुसरे को करीब से महसूस करने का जो भाव आपने इस कविता में कहा है दुपट्टा के माध्यम से वह अद्भुद है.. अभी रोबेर्ट फ्रोस्ट को पढ़ रहा था.. उनकी एक कविता है 'बोंड एंड फ्री' संवेदना के स्तर पर आप बड़े कवियों के कैसे समकक्ष हैं देखिएगा इस कविता में ....

    Bond And Free


    Love has earth to which she clings
    With hills and circling arms about--
    Wall within wall to shut fear out.
    But Thought has need of no such things,
    For Thought has a pair of dauntless wings.

    On snow and sand and turn, I see
    Where Love has left a printed trace
    With straining in the world's embrace.
    And such is Love and glad to be
    But Thought has shaken his ankles free.

    Thought cleaves the interstellar gloom
    And sits in Sirius' disc all night,
    Till day makes him retrace his flight
    With smell of burning on every plume,
    Back past the sun to an earthly room.

    His gains in heaven are what they are.
    Yet some say Love by being thrall
    And simply staying possesses all
    In several beauty that Thought fares far
    To find fused in another star.

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  21. itne bhari bharkam word se likhe hue apki rachna. per sir aab dupatte ka jamana nahi raha

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  22. बहुत खूबसूरत रचना

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